राष्ट्र-भक्ति ले हृदय में, हो खड़ा यदि देश सारा

0 CSBHIRIYA
राष्ट्र-भक्ति काव्य

राष्ट्र-विजय संकल्प

ओजस्वी राष्ट्रभक्ति कविता

राष्ट्र-भक्ति ले हृदय में, हो खड़ा यदि देश सारा, संकटों पर मात कर, यह राष्ट्र विजयी हो हमारा।

क्या कभी किसी ने सुना है, सूर्य छिपता तिमिर-भय से? क्या कभी सरिता रुकी है, बाँध से, वन-पर्वतों से? जो न रुकते मार्ग चलते, चीर कर सब संकटों को, वरण करती कीर्ति उनका, छोड़ कर सब असुर-दल को, ध्येय-मंदिर के पथिक को, कण्टकों का ही सहारा! ॥१॥
हम न रुकने को चले हैं, सूर्य के यदि पुत्र हैं तो, हम न हटने को चले हैं, सरित की यदि प्रेरणा हो। चरण अंगद ने रखा है, आ उसे कोई हटाए! दहकता ज्वालामुखी यह, आ उसे कोई बुझाए! मृत्यु की पीकर सुधा हम, चल पड़ेंगे ले दुधारा! ॥२॥
ज्ञान के, विज्ञान के भी, क्षेत्र में हम बढ़ चलेंगे, नील नभ के रूप के, नव अर्थ भी हम कर सकेंगे। भोग के वातावरण में, त्याग का संदेश देंगे, त्रास के घन बादलों से, सौख्य की वर्षा करेंगे, स्वप्न यह साकार करने, संगठित हो देश सारा! ॥३॥

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

About Us

कंपोजिट विद्यालय भिरिया

कंपोजिट विद्यालय भिरिया

वि.ख.महोली,जनपद-सीतापुर, उ.प्र. के अंतर्गत एक प्रमुख सरकारी विद्यालय, जहाँ हम ग्रामीण बच्चों को शिक्षा,सर्वांगीण विकास और नैतिक मूल्यों के साथ तैयार करते हैं।

आधुनिक शिक्षण: डिजिटल क्लास, टीएलएम, प्रोजेक्टर और इंटरैक्टिव पढ़ाई।
सृजनात्मक विकास: खेल-कूद, चित्रकला, संगीत, नृत्य और साहित्यिक गतिविधियाँ।
समर्पित शिक्षक: अनुभवी टीम द्वारा प्रत्येक बच्चे पर व्यक्तिगत ध्यान।
समुदाय जुड़ाव: अभिभावक बैठकें और स्थानीय सहयोग।