राष्ट्र वंदना
हो जन्म दोबारा यही भारत वतन मिले,
फिर से यही हिमालय गंगो जमन मिले।
फिर से यही हिमालय गंगो जमन मिले।
है धूल इसकी चंदन, अमृत है इसका जल,
है शरबती हवाओं में झूमती फसल।
ममता भरी ये गोदी फिर से नसीब हो,
धरती यही मिले हमें फिर से गगन मिले।
है शरबती हवाओं में झूमती फसल।
ममता भरी ये गोदी फिर से नसीब हो,
धरती यही मिले हमें फिर से गगन मिले।
इतिहास का हो गौरव वह आन बान हो,
बलिदान की प्रथाएं रण का विधान हो।
क्षणभर झुके न शीश चाहे टूट कर गिरे,
राणा शिवा का तेवर वो बांकपन मिले।
बलिदान की प्रथाएं रण का विधान हो।
क्षणभर झुके न शीश चाहे टूट कर गिरे,
राणा शिवा का तेवर वो बांकपन मिले।
सौभाग्य देश हित हो फिर प्राण का हवन,
अंतिम समय अधर पर जय हिंद हो वचन।
होकर शहीद इसपे अपने शरीर को,
फिर तीन रंग वाले ध्वज का कफन मिले।
अंतिम समय अधर पर जय हिंद हो वचन।
होकर शहीद इसपे अपने शरीर को,
फिर तीन रंग वाले ध्वज का कफन मिले।
हो जन्म दोबारा तो भारत वतन मिले,
फिर से वही हिमालय गंगो जमन मिले।
फिर से वही हिमालय गंगो जमन मिले।
