हर देश में तू, हर भेष में तू

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हर देश में तू - संत तुकड़ोजी महाराज

हर देश में तू, हर भेष में तू

— संत तुकड़ोजी महाराज —
हर देश में तू, हर भेष में तू,
तेरे नाम अनेक, तू एक ही है।
तेरे नाम अनेक, तू एक ही है॥
तेरी रंगभूमि यह विश्व-धरा,
सब खेल में, मेल में तू ही तो है॥

सागर से उठा बादल बनके,
बादल से गिरा जल हो करके।
फिर नहर बना, नदियाँ गहरी,
तेरे भिन्न प्रकार, तू एक ही है॥
हर देश में तू, हर भेष में तू,
तेरे नाम अनेक, तू एक ही है।

चींटी से भी अणु-परमाणु बना,
सब जीव-जगत् का रूप लिया।
कहीं पर्वत, वृक्ष विशाल बना,
सौंदर्य तेरा, तू एक ही है॥
हर देश में तू, हर भेष में तू,
तेरे नाम अनेक, तू एक ही है।

यह दृश्य दिखाया है जिसने,
वह है गुरुदेव की पूर्ण दया।
तुझसा न कोई कहीं और दिखा,
बस मैं और तू, सब एक ही है॥
हर देश में तू, हर भेष में तू,
तेरे नाम अनेक, तू एक ही है।
तेरे नाम अनेक, तू एक ही है॥
तेरी रंगभूमि यह विश्व-धरा,
सब खेल में, मेल में तू ही तो है॥

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