संगठन गढ़े चलो
संगठन गढ़े चलो, सुपंथ पर बढ़े चलो।
भला हो जिसमें देश का, वो काम सब किए चलो॥
भला हो जिसमें देश का, वो काम सब किए चलो॥
युग के साथ मिल के सब कदम बढ़ाना सीख लो,
एकता के स्वर में गीत गुनगुनाना सीख लो।
भूल कर भी मुख में जाति-पंथ की न बात हो,
भाषा-प्रांत के लिए कभी न रक्तपात हो।
फूट का भरा घड़ा है, फोड़ कर बढ़े चलो॥१॥
एकता के स्वर में गीत गुनगुनाना सीख लो।
भूल कर भी मुख में जाति-पंथ की न बात हो,
भाषा-प्रांत के लिए कभी न रक्तपात हो।
फूट का भरा घड़ा है, फोड़ कर बढ़े चलो॥१॥
आ रही है आज चारों ओर से यही पुकार,
हम करेंगे त्याग मातृभूमि के लिए अपार।
कष्ट जो मिलेंगे मुस्कुरा के सब सहेंगे हम,
देश के लिए सदा जिएंगे और मरेंगे हम।
देश का ही भाग्य अपना भाग्य है, ये सोच लो॥२॥
हम करेंगे त्याग मातृभूमि के लिए अपार।
कष्ट जो मिलेंगे मुस्कुरा के सब सहेंगे हम,
देश के लिए सदा जिएंगे और मरेंगे हम।
देश का ही भाग्य अपना भाग्य है, ये सोच लो॥२॥
संगठन गढ़े चलो, सुपंथ पर बढ़े चलो।
भला हो जिसमें देश का, वो काम सब किए चलो॥
भला हो जिसमें देश का, वो काम सब किए चलो॥
